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यह  अत्यंत  खेद  और  आश्चयत  की  बात  है  कक  विश्ि  के   सबसे  बडे

                   गर्तंत्र भारत की आजादी के  सत्तर िषों बाद भी लोक भाषा हहंदी राष्रभाषा

                   नहीं बन सकी है। ना ही संयुक्त राष्र संघ की विश्िभाषा बनाई गई। संयुक्त

                   राष्र संघ की अधिक ृ त भाषाओं और अनाधिक ृ त हहंदी पर दृस्ष्टपात करें तो

                   तनम्नमलखखत आंकडे सामने आते हैं:-

                   भाषा                   मातृभाषा              अर्जषत भाषा           क ु ल भाषा भाषी

                   अंग्रेजी               35 करोड               65 करोड               100 करोड

                   चीनी                   95 करोड               15 करोड               11 करोड

                   अरबी                   23.5 करोड             22.5 करोड             46 करोड

                   फ्र ें च               70 करोड               60 करोड               130 करोड

                   ऱूसी                   14.8 करोड             11.2 करोड             26 करोड
                   थपेतनश                 33.2 करोड             6.3 करोड              39.5 करोड


                   क ु ल                  203.5 करोड़           126 करोड़             334.5 करोड़

                   हहंदी    (आद्यतन  61.9 करोड़                 70.1 करोड़            132 करोड़

                   र्स्थनत)
                       राष्रसंघ की भाषाओं को अधिक ृ त ककए जाने का कारर् यह है कक इन

               भाषाओं  के   प्रिम  भाषा  (मातृभाषा),  द्वितीय  भाषा  के   ऱूप  में  बोलनेिालों  की

               संख्या लगभग 335 करोड है । यह संपूर्त विश्ि की जनसंख्या का प्रायः आिा

               भाग  है  तिा  विश्ि  के   50  प्रततशत  से  अधिक  देशों  में  प्रयुक्त  होती  है  एिं

               प्रचमलत  है  ।  यहद  इन  भाषाओं  में  हहंदी  को  जोड  हदया  जाए  तो  यह  संख्या

               लगभग 467 करोड हो जाएगी ।

                       इस  दृस्ष्ट  से  विश्ि  के   सबसे  बडे  गर्तंत्र  की  भाषा  हहंदी  भारत  की

               राष्रभाषा तिा संयुक्तराष्र संघ की आधिकाररक विश्ि भाषा के  ऱूप में मान्यता

               प्राप्त करने की अधिकाररर्ी है ।

                       आजादी  के   बाद  भी  अंग्रेजी  प्रशासन  और  नीतत  विषयक  विमशत  और

               कायातलयीन भाषा के  ऱूप में अंग्रजी चल रही है । इन सत्तर िषों में हहंदी की

               अपेक्षा अंग्रेजी का प्रभुत्ि उत्तरोत्तर बढा है । 1990-91 में आधितक उदारीकरर्

               ने  ऐसी  पीढी  को  जन्म  हदया  और  उनके   हदमाग  को  अंग्रेजी  के   प्रतत  अधिक

               जागरुक ककया गया कक आधितक उदारीकरर्, समृवधॎध, तकनीकी तिा प्रौद्योधगकी

               विकास तिा प्रगतत अंग्रेजी द्िारा ही संभि है । ऐसी पीढी के  हदमाग पर इस
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