Page 84 - rb156-28feb
P. 84

इसमलए एक नारा ‘‘आओ ! हम हहन्दी को लेकर चलें साि’’ हदया जा सकता है,

               स्जसे पूिािंचल भी आसानी से आत्मसात कर लेगा। तममल ने संथक ृ त के  पचास

               प्रततशत शब्दों को अपनाया है, शेष पचास प्रततशत शब्दों की सुगमता की ओर

               हमारा  ध्यान जायेगा  तो  समािान तनकल  आयेगा।  इस  इन्टरनेट  युग  में  हमें

               विदेशी विद्िानों को भी समझाना होगा। उनके  प्रभाि से विश्ि सहथत्रास्ब्द के

               मलए एक नये हहन्दी के  साहहत्य का द्िार खुलेगा।



                       नई सहथत्रास्ब्द में हहन्दी को उच्च थतरीय द्विभाषी, त्रत्रभाषी एिं बहभाषी
                                                                                                    ु
               कोषों की आिश्यकता है। लोग सीखने को आतुर हैं, आज सुवििाओं का अभाि

               भी नहीं, इसमलए नई शुरुआत की जाये। माइिोसॉफ्ट 2000 अंग्रेजी के  साि

               हहन्दी  में  भी  तैयार  हो,  इसे  अधिक  सहज,  सरल  और  व्यापक  बनाने  की

               आिश्यकता  है,  स्जससे  दूरगामी  पररर्ाम  हमारे  सामने  आये,  इससे  हहन्दी

               विश्िथतर पर प्रततस्ष्ठत होगी।



                       आज आिश्यकता है हहन्दी को पूर्ततया कम्प्यूटरीक ृ त करने की, स्जससे

               नई  सहथत्रास्ब्द  में  हहन्दी  नये  ऱूप  में  हदखाई  दे।  इसके   मलए  िततनी  और

               उच्चारर्  की  आिश्यकता  है।  िैज्ञातनक  और  तकनीकी  शब्दािली  आयोग  और

               दूसरी  संथिाएाँ  इस ओर अग्रसर हैं। आई.आई.टी.  कानपुर, के न्रीय  तनदेशालय,

               ररजित बैंक आहद भी इस ओर प्रयासरत हैं। नई शतास्ब्द को ‘‘कम्प्यूटर युग’’ या

               ‘‘डडस्जटल युग’’ कहा जा रहा है, स्जसकी चमत्काररक शस्क्त ने देश को प्रभावित
               ककया  है।  हमारे  साफ्टिेयर  इंजीतनयर और अन्य  िगत  विकास  में  लगे  हए हैं।
                                                                                                   ु
               यहद इनका सम्मान भी अपने कायत के  साि हहन्दी के  प्रचार ि प्रसार की ओर

               हो जाए तो हमें बडी शस्क्त ममलेगी। अब भाषािाद, प्रान्तिाद भी िीरे-िीरे गौर्

               होते जा रहे हैं। िैश्िीकरर् के  युग में हम नई हहन्दी की ओर आशास्न्ित हैं।18



                       विनोबा भािे मात्र एक संन्यासी या प्रबुधॎध दाशततनक ही नहीं िे िे मराठी

               भाषी होते हए भी हहन्दी के  गम्भीर समितक िे िे मलखते है ’’जहााँ तक हहन्दी
                             ु
               को राष्रभाषा बनाने का संबंि है, यह कायत हहन्दी प्रान्तों में जकदी से जकदी

               होना  चाहहए।  कक ं तु  अहहन्दी  भाषी  प्रान्तों  में  िीरे  िीरे  चलना  चाहहए।  हहन्दी

               प्रान्तों के  विश्िविद्यालयों, सधचिालयों और न्यायालयों- सभी जगह हहन्दी का

               तुरन्त प्रयोग आरम्भ होना चाहहए, कक ं तु मेरा अनुरोि है कक अहहन्दी प्रान्तों के

               मलए इस विषय में आग्रह न ककया जाए और हहन्दी भाषी सहनशीलता और सब्र
   79   80   81   82   83   84   85   86   87   88   89