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प्रश्नः-  राजभाषा  विभाग,  गृह  मंत्रालय  हहंदी  के   विकास  में  और  ककस  प्रकार


               महत्िपूर्त भूममका तनभा सकता है?


               उत्तरः- देखखए राजभाषा विभाग का कायत सरकारी कायातलयों में हहंदी को बढाना


               है लेककन अभी भी कायत हहंदी में ककतना हो रहा है यह हम सभी जानते हैं ।

               आपके  विभाग को हहंदी के  साि-साि दूसरी भाषाओं पर भी कायत करना चाहहए

               क्योंकक हहंदी के  साि दूसरी भाषाएं यहद बढेंगी तो हहंदी में कायत करने की ऱूधच


               भी जागेगी । इस प्रकार हहंदी भाषा का जन-जन तक विकास हो सकता है ।


                       राजभाषा हहंदी के  प्रयोग की व्यवहाररक िमस्याएः एक पुनववषचार



                                                                                      शासलनी श्रीवास्तव



                       आजादी की लडाई में हमारे बहभाषा-भाषी देश को एकजुट करने में हहंदी
                                                          ु
               का  महत्िपूर्त  योगदान  िा  ।  हहंदी  ने  लोगों  के   आपसी  भेदभाि  और  तमाम

               गततरोिों  को  दूर  कर  देश  के   जन-जन  को  राष्रप्रेम  के   एकसूत्र  में  बांिने  की

               महत्िपूर्त भूममका तनभाई िी । थितंत्रता आंदोलन में हहंदी की इसी ऐततहामसक

               भूममका  और  इसकी  भविष्योस्न्मखी  संभािनाओं  को  लक्ष्य  करके   देश  की

               संवििान  सभा  ने  इसे  राजभाषा  के   गररमामय  पद  पर  त्रबठाया  और  देश  की

               समन्ियपरक और समािेशी संथक ृ तत के  संरक्षर् की महत्िपूर्त स्जम्मेदारी दी ।

               भारतीय भाषाओं के  हक में यह एक बडी दूरदशीं एिं उद्देश्यपूर्त पहल िी लेककन

               राजभाषा के  प्रश्न पर सभी की राय का सम्मान और समािेश करने के  र्े र में
               एक  अनहोनी  ये  हो  गई  कक  स्जस  अंग्रेजी  साम्राज्य  के   खखलार्  आजादी  की

               लडाई  लडी  गई,  आजादी  के   बाद  उसी  अंग्रेजी  शासन-प्रशासन  की  भाषा  सह

               राजभाषा के  तमगे के  साि अगले 15 साल का पट्टा लेकर सरकारी दफ्तरों में

               कर्र से कात्रबज हो गई । नतीजा जो हआ उसे हम-आप बार-बार अर्सोस के
                                                              ु
               साि दोहराते हैं कक अंग्रेज तो गए लेककन अंग्रेजी छोड गए ।



                              मैकाले  ने  अपनी  एके डममक  प्रयोगशाला  में  भारत  की  पीहढयों  पर

               जेनेहटक इंजीतनयररंग का जो कमाल हदखाया िा, उसे आजादी के  बाद शायद

               सुिारा  जा  सकता  िा  पर  एक  अंग्रेजी  चाल  ने  अपनी  भाषाओं  को  अपने  ही
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